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आहिस्ता चल जिंदगी, अभी कई कर्ज़ चुकाना बाकी है। कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फर्ज निभाना बाकी है। रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गये , कुछ छूट गए। रुठो को मनाना बाकी है, रातों को हंसाना बाकी है। कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं, कुछ काम भी और जरूरी है। ख्वाहिशें जो घुट गई इस दिल में, उनको दफनाना बाकी है। कुछ रिश्ते बनकर टूट गए , कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए। उन टूटे छुटे रिश्तों के जख्मों को, मिटाना बाकी है। तू आगे चल मै आता हु, क्या छोड़ तुझे जी पाएंगे? इन सांसों पे हक है जिनका , उनको समझाना बाकी है। आहिस्ता चल जिंदगी, अभी कई कर्ज़ चुकाना बाकी हैं।
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