तोहफा हू या सज़ा हू
जब तेरे आस पास रहता हू दिन अच्छे जाते है| थपकीयाँ देती हैं, जब बातें तेरी नींद अच्छी आती है | मेरे हर दुख की दवा तू, मैं दूर तुझसे रहा क्यू, मेरा ही मुझको पता है| तेरा क्या है, तू ही बता दे| मैं जानू ना के तेरा तोहफा हू मैं, या सज़ा हूँ| क्या है क्या ही कहू, क्यो उलझा हू| तेरा तोहफा हू मै या सज़ा हू| क्या हू क्या ही कहू क्यो उलझा हू|| हैं जो सिलसिले इनके सिले आगे हो क्या हम जाने ना, फिर भी जवाब ढूँढे तो क्यो | जॊ होना है जैसा भी होगा तो वैसा ही फिर भी कभी सोचता हूँ| तेरा तोहफा हू मैं या सज़ा हू | क्या हू क्या ही कहू क्यो उलझा हू| तेरा तोहफा हूँ मैं या सज़ा हू । :)
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