सपनों की दुनिया
घर कहीं, नौकरी कहीं, अपने कहीं और सपने कहीं और है 1❤️ इन्हीं सपनों की दुनिया में एक दिन सब अपने ही खो जाते हैं । फिर भी पता नहीं क्यों ? हम अपने होकर सब अपनों से ही दूर क्यों हो जाते हैं ।. संघर्ष भरा जीवन हैं मेरा, जिसकी धार कहीं, मझदार नहीं । किंतु मन का कैसा पहिया है यह, जो मुझे कहता है - खाली हाथ लौटना मुझे भी स्वीकार नहीं । यूं समुद्र की गहराइयों में बारंबार खो जाता हूं , पता नहीं इस मन की व्याकुलता के लिए फिर बारंबार क्यों रो जाता हूं ।❤️
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