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हर बारीकी हर ज़र्रे से दिल– दिमाग़ हर वहमों– गुमान से तलबगार रही बेशुमार रही तेरी चाहत मे यू कि ख़ाबो मे थी, फ़रेबो मे थी होश मे आयी तो तेरे झूठे वादों मे थी। मेरे भरोसे का सौदा किया तूने अब हर शय पे मर–मिटू पर मोहब्बत की कफ़न ना हो तेरी हर सच्चाई हर नैतिकता से इकरार करती हु कि मैं तेरी अस्तित्व से भी शदीद नफ़रत करती हूं। — hema
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