मामूली शायर
मैं लिखता हूं सुनाने को यही तो काम है मेरा। मैं शायर हूं मामूली सा यही बस नाम है मेरा। कि चाहे जो भी कर लूं मैं मुझे मिलना है मिट्टी में। Ki इक दिन नाम होना है फकत बदनाम भी मेरा । सुनें मेरे बाद भी mujhako sabhi बस यही चाहिए मुझको। किसी अधने (Mamuli) से शायर सा yahi अंजाम हो मेरा।
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