पहला इश्क
ओस होठों की तेरे अपने होठों से चखकर । होश गुम हो गया सिर तेरे सीने पे रखकर। जाना पिघल मेरी बाहों में तुम यू , बर्फ जाती पिघल है जैसे धधककर। गर्मी धूप सी खुशबू बहारों सी आई, सास ली मैंने जब तेरी सासों को भरकर । चेहरा चांद सा नूर सी चमक थी उसमें , देखा जो ज़ुल्फ का बादल हटाकर । लाज़मी था खो जाना काली आखों में तेरी , देखा ही यूं तूने प्रेम आखों में भरकर । मन सुर्ख सफेद बेदाग है तेरा , मानो लाया गया हो गंगा में भिगोकर । दूर न हो मुझसे ,लिपट जाओ ऐसे , जैसे माला बने धागे मोती पिरोकर । प्यार आया है सातों जहां का यू तुमपे , न रोको ,चूमने दो तुम्हे बाहों में भरकर । जिंदगी पूरी यूं ही बिताना गंवारा, बैठे तू गर सिर मेरे कांधे पे रखकर । जान बसती है जानू तुम में ही तो मेरी , तू रखना मेरे दिल को अपने दिल में संजोकर ।
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