आधुनिक होते हम
🌹शाम को जब रेडियो चालू किया जाता तो सबसे पहले ये आकाशवाणी का विविध भारती केंद्र है और आप कुछ ही देर में सुनेंगे कार्यक्रम जयमाला इसके बाद लगातार क्रम से कार्यक्रम चलते रहते और आखरी कार्यक्रम रहता ( किसी के 🌹प्रेम की किसी के 🌹इंतजार की किसी के 🌹इजहार की वेला - ❤️रजनीगंधा❤️) तब की शाम और अब की शामों में वो बात नही अब सुविधा सब है लेकिन सुकून नहीं है, तब अभावों में रहते थे लेकिन वो पल स्वर्णिम थे समय बहुत तेजी से बढ़ रहा है, आधुनिकता ने लोगो को एक दूसरे से दूर कर दिया ,घर के सभी सदस्य अब अलग अलग कमरे में सोते है सभी कमरों में अलग अलग पंखे कूलर एसी की व्यवस्था है , पहले आंगन में एक हीं फर्राटा पंखे से पूरे घर के लोग सुकून की नीद लेते ,आधुनिकता ने लोगो से आपसी संवाद खत्म कर दिए सभी अपने अपने फोन में व्यस्त रहते है ,अब घर के सभी सदस्य साथ बैठे इसलिए घर में डायनिंग टेबल लगाया जाता है जो बच्चे रात को दादी दादा से कहानियां सुनाने की जिद किया करते वो अब मोटू पतलू और कालू का भालू देखा करते है अब बच्चो में वो बचपना नही रहा जो पहले के बच्चो में हुआ करता था बच्चो से शरारत छीन कर उन्हे जिमेद्दार बनाया जा रहा है , घर के बाहर द्वार ( दुआर) पर अंधेरे में चमकते सैकड़ों जुगनुवो को आज की चमकती LED के प्रकाश ने लुप्त कर दिया , आज आधुनिकता ने जहां हमको बहुत कुछ दिया वही हमने बहुत कुछ खोया भी है😶 ✍️
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