रामराज्य आ गया
संतप्त रहा था सनातन धर्म,जब संक्रांति काल था; पाँच सौ वर्षों तक, जो झुका भारत का भाल था। हिंदुओं के अन्तःवक्ष में,जो चुभी हुई शलाका थी; रामजन्मभूमि पर जो,फहरी मुगलिया पताका थी। 6 दिसम्बर 1992 को वह ढांचा जब ध्वस्त हुआ; हिंदुत्व का कलंक मिटा और ऊंचा मस्तक हुआ। अब भव्यमंदिर बन चुका,राम के जन्मस्थान पर; हिंदुओं में जोश-खरोश, हर्ष उल्लास उफान पर। 22.01.2024 को प्राणप्रतिष्ठा है शुभ मुहूर्त को; कोटि कोटि धन्यवाद,मोदी-योगी जैसे देवदूत को। आज त्रेता दिख रहा है, कलिकाल के भाल पर; सनातन धर्म के मान मर्यादा, आज है उछाल पर। नरेंद्र सिंह 07.01.2024
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