दिल रोता है अकेले में...✍️💔🤐
दिल रोता है अकेले में, अब मैं बयां नहीं करता, जिसे चाहा था जान से ज़्यादा, अब दीदार नहीं करता दिल रोता है अकेले में, अब मैं बयां नहीं करता, कभी यादों की बारिश में भीग जाता हूँ चुपके से, कभी मुस्कुरा देता हूँ झूठे बहानों के सहारे से। कभी दिल चाहता है फिर से सब कुछ कह लूँ, पर डरता हूँ, कहीं फिर वही दर्द न सह लूँ। कभी सोचता हूँ, शायद तू भी याद करती होगी, फिर खुद को समझाता हूँ — "अब वो कौन-सी बात करती होगी।" तेरे जाने के बाद से, मैं ख़ुद में गुम सा हूँ, भीड़ में भी तन्हा हूँ, हँसकर भी मज़मूम सा हूँ। कभी तू भी यादों में आए तो रुक जाना, मेरे नाम की हवा में एक सदा छोड़ जाना। तेरी खामोशी भी अब सवाल करती है, ये मोहब्बत भी मुझसे कमाल करती है। तेरी यादें आज भी दिल को छू जाती हैं, रातें मेरी तन्हाई में डूब जाती हैं, तेरे जाने के बाद खुद से भी वफ़ा नहीं करता। दिल रोता है अकेले में, अब मैं बयां नहीं करता,
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