जिंदगी एक संघर्ष
" ये उलझनें ये कश्मकश, ना जानें कब तक रहेंगी, जब तक चलेंगी इंसान की सास, शायद तब तक रहेंगी। लेकिन, अगर रुक गया इन संघर्षों का समर , तो थम जाएगी जिन्दगी, और थम जाएगा एक खूबसूरत सफर, बस रह जायेंगी कुछ धुँधली सी यादें, और खाक होगी बेजान काया। तोचल फिर, इन उलझनों को सुलझाते हैं, नाउम्मीदी की हर दीवार को गिराते है। गाते हैं आशाओं के गीत, और नई पहल का जश्न मनाते हैं। चल जिन्दगी, एक बार फिर मुस्कुराते हैं।"
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