आपहुदरी (जिद्दी लड़की)
हां मैं आपहुदरी हूं जिसमें विरोधाभास की भावना और रोष भरी पड़ी हैं जिसे सामाजिक दुनिया से घोर मतलब नहीं परंतु संस्कारो की जकड़न में बंधी पड़ी है कईयों की नज़रो में मैं न समझ, मंदबुद्धि, बहसी और गैर जिम्मेदार हूं और लोगों के नज़र में आपहुदरी हूं हां मैं आपहुदरी हूं मेरी वाणी में कर्कशता है तर्क वितर्क में क्रोध जिसे स्वार्थी रिशदेदारो से, घोर मतलब नहीं परंतु इज्जत सम्मान की है पूरी समझ कइयों की नजरों में मैं बरबोली, भोली, अवज्ञाहीन और मतलबी हूं और लोगों के नज़र में आपहुदरी हूं हा मैं आपहुदरी हूं।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
