नज़र!
ये रात का नशा महफूज़ हवालों से कुछ खबर लाया है | या यूँ कहूं की कुछ अच्छी तोह कुछ बुरी नज़र लाया है | मिनँतो बाद उनकी नाराज़गी की वजह लाया है, पूछती है हमसे की इतना सब कुछ खो कर भी तुमने क्या ही पाया है लगता है अरसों बाद आज एक सच नज़र आया है, की झूठ को अपनाकर हमने खुदको ठुकराया है || रात तो काली थी ही पर आज रात के नशे मे उनका दिल नज़र आया है ||
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