शब्द
मत चलाओ कभी ऐसा शब्द वाण जो सीने को भी छलनी कर जाये लाख जतन करने के बाद भी मन कभी पीड़ा से नहीं उबर पाये बातें कह लो तुम चाहे लाख हजार क्या मजाल जो मन उफ़ भी कहेगा पर उसी शब्दों में अगर विष घुला हो तब कोई भी इसे शायद ही सहेगा कल्पना से परे अप्रिय शब्दों को सुन कोई भी सहसा हो सकता है स्तब्ध क्योंकि किसी अस्त्र से भी अधिक प्राण घातक हो सकता है शब्द मुॅंह से निकला अगर शब्द अच्छा हो तो पूरा का पूरा जग जीत जाओगे जितना मन में कभी सोचा भी नहीं शायद उससे अधिक ही प्रीत पाओगे पारस नाथ झा ✍️ अररिया,बिहार
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