कुण्डलिया
शीर्षक-- सहारा 8 मुझे सहारा अब मिले, मेरा हो उद्धार। भक्त खड़ा है द्वार पर, कर दो बेड़ा पार।। कर दो बेड़ा पार, कष्ट मेरा हर लेना। हर कर मेरा दुःख, हर्ष से मन भर देना।। करो कृपा भगवान,लगे यह जीवन प्यारा। मुझे मिले वरदान, शीघ्र दो मुझे सहारा।। 9 मिले सहारा आपका, लगे जगत वरदान। करें दीन का अब भला, ईश्वर लें संज्ञान।। ईश्वर लें संज्ञान, मुझे अब जरा उबारें। मेरा कर कल्याण, सभी संकट को टारें।। विनती करता भक्त,दुःख हो नहीं दुबारा। जीवन भर हे नाथ, आपका मिले सहारा।। 20.05.2025
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