रहष्य
रहष्य =========================== जाने बीनही कुछ कहना, ये तो गलत बात है, सोच और ढकोसली आदत, पालना, ये तो गवार से भी बत्तर है। हर ईन्सांन यहा, एक रहष्य है, कीसी को कम या जादा आकना, ये तो बुरी बात है। पैसे से बढकर भी यहा बहोत कुछ है, वास्को द-गामा का शोध यहा, आज कीतना पावर फुल ह। बंधीसोसे बांधा आदमी कमजोर नही है, वक्त वक्त की बात है, रहष्य जैसा खुल जायगा, हर ईन्सांन का रंग सामने आ जायेगा। ऊसमे कौन सी नयी बात है, यहा खुद मे झाको तो, हर आदमी रहष्य का भांडार है, हर आदमी रहष्य का भांडार है.। ====================
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