मैं क्यों डरता हूँ ?
मैं क्यों डरता हूँ उन गुनाहों से जिसे मैंने किया ही नहीं ? मैं क्यों डरता हूँ उन आँखों से जिसे मैंने अब तक चुमा ही नहीं? मैं क्यों डरता हूँ उस पत्थर से जिसे मैंने भगवान माना ही नहीं? मैं क्यों डरता हूँ उस प्यार से जिसे मैंने कबूल किया ही नहीं? मैं क्यों डरता हूँ उस रात से जिसमें मैंने सवेरा देखा ही नहीं? मैं क्यों डरता हूँ ?
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