औकात
औकात ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कुछ सालो बाद........., स्पेशल....,मेरे, मोबाईल पे एक फोन आया, आवाज तो एकदम जानी, पहचानीसीही लग रही थी. फॅक्टरी का महोल , कुछ ऊठ गीरनेकी आवाज मै खुर्ची पर, आरामसे ... निहारते बैठा था. मैना जयजा लेते पुछा हॅलो कोण? सामने पुछा गया.... मै मै........., , ठीक है बोलो. कैसी हो..? मै ठीक मु तुम कैसै हो. मै मुस्कुराया और बोल पडा, अब मै एकदम ठीक हु, ठीक हु....... !, क्यु कीअब मै , तुम्हारे औकात से बाहर आ गया हु, तुम्हारे औकात से बाहर आ गया हु. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
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