ये जो मुस्कुराहटें हैं....!
ये जो मुस्कुराहटें हैं। उड़ते हुए गमों की आहटें हैं ।। चेहरों की मुस्कान कुछ कहती है। नदियों की धारा सी ये बहती है।। हर खिला. खिला चेहरा यहाँ । गम या गमगीन का न पहरा यहाँ ।। बादलों में छिपी चन्द्रमा की वो मोहिनी है। फिर भी ! उम्मीदों को लगती इक जरा सी कोहिनी है।। पर क्या करें आदते तो आदतें हैं। ये जरा सी खिली मुस्कुराहटे हैं।। मुस्कुराहटों के आहटों से पनपी अपनेपन की जज्बात है। इन्हीं जज्बातों के ओट में लिखी आने वाले कल की रात है।। उम्मीदों की लहरों से ये चाहते है। लगती ठोकरों से लड़ झगडने की छटपटाहते हैं।। लिखने को नए सबेरे की आह है। दूरियों को समेटने की भी चाह है।। बातों बातों में सुकुं की अरमान है। मुस्कुराहटों की भी यही तो पहचान है।। ये जो मुस्कुराहटें हैं। उड़ते हुए गमों की आहटें हैं....... जीवन में खुशियों की लम्बी कतार है। उनको पाने की डगर में पत्थर हजार हैं।। पत्थरों को धकेलने की मुश्किल चाह है। पर उनसे जुड़ी बातें बेमिशाल है।। है जुगनुओं की तलाश अंधेरो के घर में। आखिर उनसे मिलती रोशनी जो लाजवाब है। यही तो लिखा संघर्षों की अरदास है। रख भरोसा खुशियाँ जो तेरे पास है।। खनकती हुई उजाले की चहक दरवाजे पे है। यही है वो जुगुनू जिसकी तुझे तलाश है।। कलरव की कपोल शाखाओं पर । चिड़ियों की चहचहाहटें हैं।। ये जो मुस्कुराहटें हैं। उड़ते हुए गमों की आहटें हैं...।।
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