आसान समझ लेते हैं
शायरी को भी लोग आसान समझ लेते है, अपनी तहरीफ को सामान समझ लेते हैं। कोई अफवाह न फैलाए वतन मे अपने, लोग मोदी को भी इमरान समझ लेते है। शुहरते ऐसी भी देना न किसी को प्रभु, लोग पत्थर को भी भगवान समझ लेते हैं। देख कर उसकी मोहब्बत से भरी सूरत को, सब उसे मीर का दीवान समझ लेते है। कितने तहजीब शुदा है मेरे भारत वाले, अपने दुश्मन को भी मेहमान समझ लेते हैं। बात करती हु मै उर्दू मे तो हैरत क्या है, लोग क्यू मुझे मुसलमान समझ लेते है। कितना मुश्किल है नए दौर मे जिंदा रहना, लोग मरने को ही आसान समझ लेते है।
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