गिरिधर श्री कृष्ण कन्हैया
वसुदेवकी पुत्र कृष्ण जो लल्ला मैय्या यशोधा का पूरी नगरी का कान्हा कहलाए प्यार था पहला राधा का। बासुरी के धुन से जिसकी पूरी नगरी पावन हो जाये मोरपंख मुकुट मे जिसकी मीरा भी मोहित हो जाए । सुदामा जैसे दोस्त जिसके बलराम भाई कहलाये रास्ता रोक गोपियों के मटकी फोड़ के माखन खाए शिकायते जब आए उसकी भोला भाला मुख बनाए नटखट कान्हा कृष्ण कन्हैया गोवर्धन उंगली से उठाए रक्षा कर नगरी की जिससे इंद्र देव भी शिश झुकाएँ कंस मामा शकुनि जिसके षड्यंत्र जिसने खूब रचाए बुद्धि का सामर्थ्य दिखाकर कान्हा ने वो मार गिराए। यशोधा का नंदलाला द्वारका नगरी में आए रक्षा कर द्रोपदी की भाई का वो फर्ज निभाए जब आइ बात महाभारत की हुई घोषणा युद्ध की द्वंद स्थिति अर्जुन की थी जब भाईयों में जंग छिड़ा बात नही थी अपनो की यहां न थी बात पराए की ... जब बात आई सच्चाई की तो श्री कृष्ण ने अर्जुन का साथ दिया। सही समय के सही फैसले अच्छाई का विजय हुआ प्रखर युद्ध, बुद्धि के बल से महाभारत भी सफल हुआ। - संविधा वाळले
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