दिल की पुकार
टूटे हुए कांच के हजारों टुकड़ों को बहुत नाजों से जोड़ के, मेरा घर बना है यारो अपना ही खून बहके। भड़कती हुई आग में कूदकर, बचाया है मैने रिश्तों को जलने से। पल भर में संबंध तोड़ देने वाले क्या ही हमें इश्क की सलाह देंगे, हमने तो खुद को कुर्बान किया है महबूब के खातिर।
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