कर्म कारण
कर्म कारण,भाग्य धारण । कार्य साधक,सुख वाहक।। ठोस उद्यम, बन नरोत्तम । रह न वंचित,धान्य संचित ।। 1 दूर हो भ्रम,प्राप्ति बिन श्रम। व्यस्त रह कर,कष्ट सह कर ।। हो न तू हत, बैठ यूँ मत। रात-दिन खट,टाल संकट ।।2 जिंदगी भर, श्रेष्ठ तू कर। छोड़ आलस,बांध साहस।। हो न कातर, तोड़ पत्थर। ऊंच चाहत, प्राप्त राहत।।3 नरेंद्र सिंह, गया
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