बेवफा
दूर रहकर भी तेरा वो गम साथ है जो पल भर में हसी को आसू में बदलके अकेला छोड़ जाता है। जब मन चाहा नीचा दिखा दिया और जब चाहा उड़ती पतंगों जैसी हमारे तारेफो के पुल बांध गए। इस बेतुखा बदलते मौसम पर हमारे हाय को भी नादानी समझकर टाल दिया जाता। नादान तो नादान सही कभी बिन बोले एक नादान के मन की पीढ़ा सेहकर तो दिखाओ तुम्हारे घाव चिल्लाकर तरस की भीख ना मांगे तो तुम्हारी जी हजूरी में हद पार कर जायेंगे। जब अकेले लड़ना सीख गए इसे भी नफरत का जहर समझकर गट जाएंगे। Pee jayenge
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