किस्मत
किस्मत ने मुझे उस उम्र में उदास किया , जिस उम्र में लोग अपने शौक पूरे करते हैं । जहां हंसी-ठिठोली का था दौर , वहां मेरे हिस्से में दुख बरसे हैं । ख्वाब सजाए थे पर टूट गए , हसने के दिन थे और हम रूठ गए । जो चाहा था वो मिला नहीं, जो मिला वो अब रहा नहीं । मगर ये दौर भी गुज़र जाएगा . कोई नया सूरज फिर आएगा.. शायद तब मेरी भी बारी होगी ... जब किस्मत मेरे हक़ में मुस्कुराएगी ....!
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