एक किसान
कीचड़ लगे हाथों से जो सोना उगते हैं, संघर्षों के राहों में तनिक नहीं घबराते हैं, मुस्कान लिए चेहरों पर और चलते सीना तान हैं, हाँ वो किसान है.. बांध लिए पगड़ी सर पर मानो बंधी जिम्मेदारी, लिए कुदाल हैं कंधे पर बनती है जिससे क्यारी, फसल उगाते औरों के हित गर्व है स्वाभिमान है, हाँ वो किसान है.. बारिश हो या धूप छांव जिसने सबको ही झेला है, सबकी भूख मिटाने हेतु लड़ रहा वही अकेला है, अपना सबकुछ लगा खेत में लिए दिल में अरमान है, हाँ वो किसान है.. चुनौतियां भी हैं जीवन में लेकिन घबराना प्रथा नहीं, ऐसा भी तो नहीं है की उनके मन में व्यथा नहीं, कर्जों से दबे हैं कंधे पर कंधों पर हल का पाल, धरती माता सोना उगले गदगद किसान तब हो निहाल, आखिर यही किसान तो भारतभूमि की शान हैं, हाँ वो किसान है..
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