कोशिश में कशिश हैं।
ऊंचा मस्तक किए हिमालय, युग-युग से है खड़ा हुआ, पहरेदार बना उत्तर में, सीमा पर है अडा हुआ, आंधी तूफानो में इसने, सदा अटल रहना सीखा, हिम की ठंडी वर्षा को भी, चुप रहकर सहना सीखा। हम भी पथ पर अडिग रहे नित, हिमगिरि का संदेश यही, जिसमे दृंढ विश्वास भरा है, नभ तक ऊंचा उठा वहीं। - साक्षी 🖤
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