ऐ हमदर्द
ऐसा क्यों हुआ ऐ हमदर्द हम इतने करीब होकर भी दूर क्यों हो गए क्या कोई गलती की थी मैंने;मेरे हमदर्द जो पास होते हुए भी हम कभी मिल न पाए कैसा गुज़ारे वो लम्हें मैं कभी समझती हूँ, तो कभी महसूस होता है क्या ऐसा ही प्यार होता है जो एक पल के लिए दर्द और दूसरे पल के लिए गम दे जाता है बस, अब थम जा मेरे लम्हें मैंने बहुत सह लिया ये जुदाई, ये दर्द न जाने कैसा होगा मेरा हमदर्द ठीक तो होगा या उसने भी इस दर्द को घोंटना सीख लिया मेंरी आँखों में आज भी तेरी वही तस्वीर है न जाने अब भी वैसा ही पाऊँगी या तुम्हें उभार कर ही तुमसे मिल पाऊँगी न जाने कैसी ये तकदीर है न जाने..... कैसी ये तकदीर है। #With ❤️ Sachtz 😇
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