प्रामाणिकता
प्रामाणीकता =================== ईतीहास गवाह है, धुर्त तो ने प्रामाणीकता का, हामेशाही गला घोटा. बात एकलव्य कीही लेलो, साधना कर उसे क्या मीला, छलकपट, धोका फरेब. दुनीया आज की हो या कल की, जैसा को तैसा ही बणो, वरणा ......, प्रामाणीकता का प्रमाण देते देते, मरो. ये देखावे की दुनीया, सच्चाई के आलवा....., हत्यार सब रखो!, . आवाज....... बाज......., और साम, दाम, दंड, भेद.... नीती टाईम पडे तो, सब आपनावो, सब आपनावो. ===============
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