यादों का सफर
शीर्षक - यादों का सफर ये यादों का सफ़र खुद से मिलने का सफर एक नई शहर , एक नई सोच मै ढूंढ रहा हूं खुद को पता नहीं इस सफर में मै खुद से मिलू पाऊं या नहीं कुछ यादों को समेट हुए फिर चल पड़ा हूं अपने शहर की ओर फिर वही पुरानी यादें दुमका के वही टावर चौक पर चाय की चुस्की और पानीपुरी की वह तीखी यादें गांव के वह बचपन के दोस्तों को याद करते हुए मैं ट्रेन पर बैठ कर फिर से मै वही पुरानी यादों में खोया हूं , वही मुस्कान, वह पुरानी यादों को लेकर मै फिर से चल पड़ा हूं अपनी शहर की ओर । मनोज सोरेन ✍️✍️✍️
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