तकलीफ.. 🌸
ख़ुद को कैसे संभालूँ, ये समझ नहीं आ रहा, डाँदूँ या प्यार जताऊँ, ये समझ नहीं आ रहा। ये कैसी उलझन है दिल में, जो सुलझती ही नहीं, कैसे सुलझाऊँ इसे, ये समझ नहीं आ रहा। वक़्त-बेवक़्त ये आँखों में कैसा पानी है, किस बात से रूठा है मन, ये समझ नहीं आ रहा। डर किसी और का नहीं, डर बस इतना-सा है, जो भीतर टूट रहा है उसे कैसे थामूँ— ये समझ नहीं आ रहा... ये समझ नहीं आ रहा।
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