मन की बात
जुबां पे आई मन की बात रेहना था हमेशा तेरे साथ पर ना कभी बात हुई ना मुलाकात मन में ही रेह गयी मेरे मन की बात 🤍 तू मिला ना राहो में तो कैसे देखता मै तेरी निगाहों में में रखता हूं बस अब तेरे ख्वाबो के साथ क्यौकी मन में रेह गयी मेरे मन की बात 🤍
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