"स्वीकार्यता"
मुझे स्वीकार है तुम्हारी उथली चालाकियाँ मुझे स्वीकार है तुम्हारी अकारण विवशता मुझे स्वीकार है तुम्हारी स्वार्थपरायण मुस्कान मुझे स्वीकार है सहर्ष तुम्हारे हाथों लुट जाना मगर मुझे स्वीकार नहीं मेरे मन का मालिन हो जाना मुझे स्वीकार नहीं मेरे चित का पतित हो जाना मुझे स्वीकार नहीं मेरे हल्केपन का खो जाना मुझे स्वीकार नहीं निज स्वार्थवश तुमसा हो जाना
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