मगही में बसे परान (गीत )
जहिया ल रहतो हम्मर जान हो, हम्म करब मगही के गुनगनमा।। जहिया ल रहतो हम्मर जान हो, हम्म करब मगही के गुनगनमा।। मगही लिखबो अउ मगही बोलबो। मगही में ही हम्म मुँह खोलवो।। ई हे बड़ निम्मन रसगर भासा। तुहुं द आदर नै करs तमासा।। गावs मगही में छंद गान हो, तो मगही के बढ़तो पहचनमा। जहिया ल रहतो हम्मर जान हो, हम्म करब मगही के गुनगनमा।। मगध के ह तो मगही ही बोलs। मगही में अप्पन मुहमा खोलs।। कमाई ल तू जने तने डोलs। उहाँ उहाँ मगही के रस घोलs।। मगही के सभे करs उथान हो, ई भासा ल सभे करहु परनमा। जहिया ल रहतो हम्मर जान हो, हम्म करब मगही के गुनगनमा।। सगरो जा एकरा फईलावs। मन भर एकर बड़ी गुन गावs।। एकर समरिध इतिहास सुनावs। ई बतिया बहरे जाके बतावs।। मगही ल लगा देहु जी जान हो, मानs तू नरेंदर के कहनमा। जहिया ल रहतो हम्मर जान हो, हम्म करब मगही के गुनगनमा।। नरेंद्र सिंह, गया 22.02.2025
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