स्वतंत्रता की आग 🥺🖇️
जलती रही नारियाँ जौहर में ! भेड़िये फिर भी मौन थे, हमें बताया गया कि अकबर महान ! तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे? अरे सड़ती रही सड़को पर लाशें ! गांधी फिर भी मौन थे , हमें सिखाया गया कि , गांधी के चरखे से आजादी आई ; तो फांसी पर लटकने वाले वो, 25 - 25 साल के नौजवान कौन थे । अरे आज भी संग्रहालय में, सजोह कर रखी गई है वो रस्सियां, जिससे गांधी जी अपनी बकरियों को, बांधा करते थे । अरे कहाँ गई वो रस्सियाँ जिसपे , भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव हँसते -हँसते झूले थे । कितने झूले थे फाँसी पर ! कितनो ने गोली खाई थी । "अरे क्यू झूठ बोलते हो साहब कि " गांधी जी के चरखे से आजादी आई थी ।
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