बीती बातें !
सुना है... राह बदल रहे हो...! सुना है... चाह बदल रहे हो...! कभी जो ख्वाबों में आओगे...! मंद उर में अपार गति लाओगे...! क्या सच में दिल के मेहमान बनकर रह जाओगे...? कट रही थी जब रातें मेरी तन्हाई में...! ढल रहे थे दिन मेरे ख्वाबों की जुझाई में...! तब तेरी मंद आहटों ने जिंदगी मेरी महकाई थी..! तेरी आहटों से बेहाली में भी खुशहाली आई थी...! काले अंधेरों में भी जिंदगी मेरी जुगनू सी जगमगाई थी..! क्या सच में हमारी चाहतों के अरमान बन रहे हो...? क्या फिर से एक बार गुमनाम बन रहे हो...? उफ...! जब जिंदगी स्थिर चलेगी, कमी तेरी ही खलेगी...! गुलाब सी महक तेरी..! चिड़िया सी चहक तेरी..! अब न आएगी, किन्तु जब भी आएगी रग रग चेतन कर जाएगी..! बातें बीत जायेगी..! रातें कट जायेगी..! पर कम्बख्त तन्हाई तेरी उर की गति बड़ा जाएगी..! राही बीती बातें बहुत याद आएगी..! खुशहाल जिंदगी में भी आँसू छलका जायेगी...! उफ ! यह बीती बातों का दौर...! -रावल
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