नारी सम्मान
नारी के सम्मान को ताड़ ताड़ सा कर डाला और मर्यादा के आंचल को फिर जार जार सा कर डाला मारा है मुझको बालों से मुझे घसीटा है फिर बर्बरता की उन सारी सीमाओं लाघा है फिर उन घनी अधेरी सड़कों पर मुझे तड़पता छोड़ दिया सन्नाटे में चीख रही थी खून से लतपथ वो काया सबने तस्वीरें खींची कोई मदद को आगे न आया कोई मदद करो _2 ये चीख चीख कर चीख भी मुझसे रूठ गई जब होश में आयी समाज की बाते सुनकर टूट गई परिवार की बदनामी होगी सब मुझे यही समझाते हैं ये नए उम्र के लड़के हैं थोड़ा तो बहक ही जाते हैं अरे भूल जाओ जो हुआ उसे ये लड़के बच ही जाएंगे तुम लड़की हो दुनिया वाले तुम पर ही प्रश्न उठाएंगे क्यों कोई नहीं था साथ में क्यों निकली आधी रात में क्या मेकअप था क्या गहने थे क्या छोटे कपड़े पहने थे प्रश्नों की भूल भुलया में सच्चाई कही खो जाती हैं सब भूल जाते हैं लड़की घुट घूट कर मर जाती है
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