शहर की जिंदगी
चमकते हैं शीशे के महल यहाँ, पर दिल में छुपी है तन्हाई का पहरा। भीड़ में खो गया कोई अपना, किसी की परवाह नहीं यहाँ । सड़कों पर चलते कदम तो अनगिनत, पर किसी की निगाहों में नहीं इंतज़ार। हर चेहरा एक कहानी छुपाए, पर बोलते नहीं, बस नज़रें चुराए। रात की रोशनी में छुपा दर्द, हर हँसी में छुपा अकेलेपन का भ्रम। शहर की ये तेज़ रफ्तार, ये हलचल, जहाँ रिश्ते बनते हैं पर टूटते भी पल में। इंसानियत की तलाश यहाँ खो सी जाती, दिल कहीं अंदर से धीरे-धीरे मर जाती। -अनुष्का यादव
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