चाय की महिमा
जय जय जय चाय महारानी, कलयुग में हर घर की रानी। अमीर-गरीब सबकी तू प्यारी, तेरा गुण गाती है दुनिया सारी। अंगेजों ने तुम्हें भारत में था लाया, आलसियों को वो चस्का लगाया। जैसे ही कोई उठता छोड़ बेड, सर्वप्रथम चाहिए उसे टी बेड। कोई ज्योहीं दर पर कभी आते , स्वागत में तुझसे ही फ़र्ज़ निभाते। आज तुम सबकी इज्जत रखती, तुम से होती अतिथि सेवाभक्ति। गरम गरम तुम कप में परोसी जाती, अतिथि के मन को, तुम है हरषाती। तुम न मिले तो अतिथि पछताता, निंदा कर वह तनिक नहीं अघाता। दूध,शक्कर और चायपति मसाला, नींबू की चाय,लिकर लगती है हाला। अत्यधिक जो तुझे है अपनाता, उसे नाना प्रकार के रोग सताता। तुझे बासी मुँह जो पीते हैं लोग, उसे जकड़ता कठिन गैस रोग। बैठकी में ऐसे लोग जो बैठ जाता, यदा-कदा सस्वर दुर्गंध फैलाता दिनभर में एक दो बार जो पीते, वो सैंकड़ो वर्ष तक रहते हैं जीते। दो से ज्यादा तुझे जो अपनाता, अल्पआयु में स्वयं को दफनाता। तुलसी,लौंग ,सौंफ और अदरख, ऐसी चाय जब मन करे तब चख। ऐसी चाय होती है अमृत तुल्य, "नरेंद्र" की बात को मत कोई भूल। नरेंद्र सिंह 05.12.2023
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