नारी
वह लड़की थी, बस यही उनकी गलती थी । हम मना रहे हैँ अमृत काल , पवन धरती कहने वाली भारत देश मै, बस कलम से लिखा हैँ , एक कागज की टुकड़ो मै। पलट के देखो उन कागज के पन्नो को, जमीन पर हकीकत कुछ और है । आज भी देश की बेटियां पी रहा है जहर कुछ हैवानो और दरिंदो की हाथो से । जिस हाथो ने उठाया था कलम अपनी खुदीकी एक तकदीर लिखने , वही हाथ आज लातपात है अपने हि खुन से । वह लड़की थी , बस यही उनकी गलती थी ।।
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