हम तुम मिले थे कहीं
हम तुम मिले थे एक दिन अनजाने बनकर, इस दुनिया की भीर में कहीं... देखते देखते दिन बीत गये, कई शाम बीत गये, फिर एक दिन हम मिले थे कहीं... हमने जो तुमसे कहा था कभी, तुमने भी सुना था कभी... हम कहीं भीर में खो जाये तो मिलेंगे कहीं, ढूंढ लेंगे दिलों की डोर को कहीं... बच डर इतना था कि हम खो ना जाये कहीं... अंजानी सी दुनिया में अनजाने से तुम थे कहीं... पास ना हम थे ना हमारी ईयादे थे कहीं... मिल थे हम भी कहीं... पर ईयादे बच इन दिलों की मुलाकात की है ... देखो अब हम हो चुके एक दूजे की खयालों में गुम कहीं... साथ तो चलना ही है... चलो दिलों की डोर से बांधे एक दूजे को... चाथ हर पल की खुशियों को बांधे इस दिलों की डोर में कहीं... चालों पहले की बह मिलाकात भी याद आती है... गुज़रे लम्हों को हम भी याद करते है काभी... तुम जो थे हमसे दूर दूर कहीं... अब देखो बस तुम्ही हो सार पल मेरा आश पास कहीं...
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