बचपना
कहते हो बचपना जिन्दा रखो तो क्या जिम्मेदारी भी ले लोगे वो सजा गलतीयों कि माफ कर दोगे बेपरवाही और लापरवाही मुझे करने दोगे मेरी हर बात पर वो शाबाशी दे दोगे कहते हो बचपना जिन्दा रखो तो मेरा बोझ अपने कंधों पर उठा लोगे मेरे लिए दुनिया से लड़ लोगे समझदारी का पाठ पढ़ाना बन्द कर दोगे मुझे वो मां बाबूजी कि गोद लाकर दे दोगे कहते हो बचपना जिन्दा रखो धीरज शेखावत
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