तेरे बिना ये रातें भी
तेरे बिना ये रातें भी जैसे सज़ा बन गईं, चाँदनी भी अब तो तन्हाई में डूब गईं। तेरे बिना मेरी साँसों में वो सुकून कहाँ, हर लम्हा तुझे सोचकर बस आहें सी बन गईं। कभी सोचा था तुझसे बिछड़ना होगा यूँ, कि हर धड़कन में तड़प का सिलसिला होगा यूँ। जिसे देखा था सपनों में अपनी जिंदगी बना कर, आज वही रूठ गया मुझे अधूरा सा छोड़कर। तेरे बिना बारिशें भी अब नहीं भिगोती हैं, वो तेरी हँसी, अब मेरी दुनिया में नहीं होती है। तू साथ था तो हर दर्द भी प्यारा लगता था, अब तो खुशी भी जुदाई का इशारा लगती है। मैं हर रोज़ तुझसे मिलने की दुआ करता हूँ, तेरी तस्वीर से आँखों में नींद भरता हूँ। तेरे बिना कुछ भी नहीं है इस जहान में, मैं जी रहा हूँ, मगर जैसे बिना जान के। कभी जो लौट आए तू बस इक बार, मैं तुझसे फिर ना मांगू कोई प्यार का इकरार। बस बैठा रहूँ तेरे पास, चुपचाप, बेजुबान, तेरी धड़कनों में खुद को खो दूँ बेमिसाल । 2025-07-29
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