लबों को
बाहों में हमको समाने दो जरा सांसों से सांसे मिलाने दो जरा आने न पाए दरम्यां हवा भी हमारे इतना करीब हमको आने दो जरा लब जो आज तक कह नहीं पाए बातें वो आंखों को बताने दो जरा बदन की खुशबू भर जाए सांसों में कुछ ऐसे खुद में खो जाने दो जरा इन आंखों में चेहरा नजर आए तेरा इन बातों में बस जिकर आए तेरा हकीकत में मिलना नहीं हो पा रहा ख्वाब तो हसीन से सजाने दो जरा 😊 अल्फ़ाज़ - ए - नीरज✍🏻
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