माॅं
माॅं ===================== माॅं तुझे बहोत मीस करता हु माॅं, तुझे कुछ पुछना चाहता था माॅं, आखीर क्या गलती थी मेरी...., जो तुभी मुझे पहचान नही पायी माॅं. गलत मतलब निकाल मेरे, खिलाफ आखीर तु भी क्यु, थोडी देर बहक गयी थी माॅं. माना की बुरी संगत का आसर होता है, कान भरनेवालोकी बडी फौज होती है, पर एक माॅं..... बीखर जातये वो कैसी माॅं.. यही सब पुछना चाहता था माॅं. तु मेरे सवाली? चेहरे से ईतना डर गयी, मौत तो तेरी बहोत दुर थी.... तु बहोत पहले ही चली गयी. माॅं तुझे बहोत मीस करता हु माॅं, मै तुझे अबभी प्यार करता हु माॅं. फकत अब कसुर ईतना है की मेरा.., अब हर माॅं की तरफ........, संदेह भरी नजरेसमोर देखता हु माॅं, संदेह भरी नजरेसमोर देखता हु माॅं ==========================
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