है इश्क तो असर भी होगा
है इश्क तो असर भी होगा , जितना इधर है , कुछ तो उधर भी होगा। इधर जो धड़कनें तेज हैं नज़रों में जो प्यार है, क्या उस ओर भी बेचैनी , क्या उस ओर भी करार है? ये जो मीठी सी कसक है, ये जो अधूरी सी पुकार है , ज़रा सा हिस्सा इसका , उस मन को भी गवारा तो होगा। है इश्क तो असर भी होगा, जितना इधर है तो कुछ तो उधर भी होगा। ये ख़ामोशियाँ जो लब पे हैं, पर आँखों से बोलती बहोत हैं, ये इंतज़ार की रातें, जो राज़ दिल के खोलती बहोत हैं। जो रोशनी है मेरी दुनिया में तेरे ख्यालों की, वो शमा तेरी दुनिया में भी तो कभी जलती तो होगी। है इश्क तो असर भी होगा, जितना इधर है तो कुछ तो उधर भी होगा। तेरी साँसों की महक मुझ तक यूँ ही तो नहीं आती , हवाओं में तेरी खुशबू का कोई छोटा सा सफ़र भी तो होगा। है इश्क तो असर भी होगा, जितना इधर है तो कुछ तो उधर भी होगा।।
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