एक फौजी
घोड़े सी वो दौड़ लगाना सीना चौड़ा कर दिखलाना, इंच कम ना रहे ऊंचाई तब जाकर फौजी कहलाना.. देश प्रथम का भाव लिए सेवा पथ पर बढ़ते जाना, भारत माँ का मान बढ़ाने नित्य दिशा गढ़ते जाना.. दुश्मन पर रहे गिद्ध की नजर ना इस पार कोई आने पाए, चाहे जान मेरी जाए पर देश पर मेरे आंच ना आए.. कभी बम के धमाके तो कभी दुश्मन की गोली, शरहद पर ही बीत गए ना जाने कितने होली.. अपनी कहां परवाह उन्हें वो देश पर जां लुटाते हैं, अपना सर्वस्व अर्पण करने में तनिक नहीं घबराते हैं.. राह तकती रहती मां की आंखे-कब लाल मेरा घर आएगा, कब वो नन्हा बच्चा बन मेरे सीने से लग जाएगा.. आखिर घात लगाए दुश्मन के एक दिन शिकार वो बन जाते हैं, एक माँ के खातिर एक माँ से जुदा हो जाते हैं.. बलिदान उनका देश भला कैसे कभी भूल पाएगा, याद कर उन बलिदानियों को वंदेमातरम् गाएगा..!!
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
