असीम मोहब्बत
मेरी सास अटल गई उसकी जान में और बाकी बची बह गई आंखों से बहती अश्कों में। बदन थरथरा गया थकान से पर नींद की एक झलक नहीं। रात गुजर गई उसके ख्यालों में पर सवेरे उसे बताने के सही शब्द न मिले । तरस गई ये बाहें उसमें सिमटने को पर मजबूरिया ऐसी के उसे मिलने में ज़माने लग गए
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