आपको हम कुछ ऐसे देखते हैं..
उल्फत, इमान ,करम,नज़ाकत से देखते हैं, हम आपको बड़ी इबादत से देखते हैं। लग न जाए नज़र हमारी आपको, इसलिए हम आपको थोड़ा कम देखते हैं। छुपा के रखते हैं दिल में ये चाहत अपनी, कहीं रुस्वा न हो जाए ये मोहब्बत अपनी, हमारे ख्वाबों में तो अक्सर आती हो आप, कभी जो आए हम भी आपके ख़्वाब में, तो जानो कि किस हसरत से हम आपको देखते हैं!! हम तो बस आपकी निगाहों को देखते हैं, नज़र चुरा लेती है आप जब भी हम आपको देखते हैं, कभी मिलाए न नज़र हमसे, तो पता चले कितने शराफत -ए -कशिश से देखते हैं!! कि दुनिया की नजरों से थोड़ा छुपकर देखते हैं, थोड़ी झिझक, थोड़ी शर्म से देखते हैं, बादलों में छिपे जैसे तारे चांद को देखते हैं, हम अपनी निगाहों की ज़ुबान से आपको देखते हैं!! बस इतना देखते हैं कि इन आंखों का गुजारा चल जाए, कभी देखो तो जानो हम आपको कितनी शिद्दत से देखते हैं, उल्फत, इमान ,करम,नज़ाकत से देखते हैं, हम आपको बड़ी इबादत से देखते हैं। हर बार आपको देखकर खुदा को देखते हैं। लग न जाए नज़र हमारी आपको, इसलिए हर रोज़ थोड़ा और कम देखते हैं।
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