तेरे बिना मैं.. 🥺🌸
उसने मुझसे पूछा सच बताना... अगर कभी मैं न रहूँ तो तुम्हें कैसा लगेगा? कुछ देर मैं साँस नहीं ले पाया... फिर थामकर अंदर की चीख मुस्कराया और बोला- वैसा ही- जैसे बिना बारिश का सावन बिना पानी की मछली बिना धान का बंजर खेत सूखा-टूटा पेड़ बिना नीर का बादल बिन खुशबू का चन्दन सीया बिन रघुनंदन बिना राधा के कृष्ण तीक्ष्ण न हो वो बाण देह जैसे बिना प्राण जैसे- मेरे बिन तुम और तेरे बिन मैं
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