क्या जीत क्या हार!
हौसला भी बहुत था और प्रयास भी भरपूर था, जीतने का अवसर हमसे बस एक गेंद दूर था, मगर युद्ध का मैदान हो या क्रिकेट का ग्राउंड, इसमें किसी एक को होना पड़ता है आऊट। जीत हर किसी को थोड़ा खास बना देता है, हारने वाले का थोड़ा परिहास बना देता है, जीतने का रुझान दोनों तरफ नज़र आता है, तालियों का शोर दोनों के हिस्से में जाता है, मगर ट्रॉफी कोई एक ही उठाता है, दूसरा भी दबे मन से शोक मनाता है, मगर ये शोक नहीं बस एक अँधेरी रात है, सुबह होते ही एक मुस्कान से भूलनी ये बात है, अपना बेहतरीन हर किसी ने दिया है, बल्ले से गेंद से खूब आनंदित किया है, हार भी बहुत कुछ सिखा जाती है, राह कुछ नया सदैव दिखा जाती है। उदासी छोड़ अब अपना जौहर दिखाओ, HHMD थाम यात्रियों से नजरें मिलाओ, कर्तव्य पर लौट साप्ताहिक अवकाश दिलाओ, कब से अटके हैं हम थोड़ी राहत पहुँचाओ। - हेड कोच ( उप0नि0 नरेन्द्र सिँह )
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